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परोपकार का अर्थ है दूसरों की भलाई करना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना यह मनुष्य का एक बहुत महान गुण है।Philanthropy means doing good for others and helping those in need; it is a very noble human quality.

 हमारे समाज में कई ऐसे लोग होते हैं जिन्हें सहायता की आवश्यकता होती है। यदि हम उनकी मदद करते हैं तो इससे उन्हें राहत मिलती है।

परोपकार करने के लिए केवल धन ही आवश्यक नहीं होता। हम अपने अच्छे व्यवहार समय और सहयोग से भी दूसरों की मदद कर सकते हैं। छोटे-छोटे कार्य जैसे गरीबों की सहायता करना बीमारों की सेवा करना और जरूरतमंदों को भोजन देना भी परोपकार के उदाहरण हैं ठीक उसी भाव को लगातार जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म सा कि उज्जवल परंपरा के महान संत एवं मेवाड भूषण श्री प्रतापमाल जी म सा, संथारा साधक महाश्रमण प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी म सा के शिष्य महान साधक तपस्वीराज श्री अभय मुनी जी म सा ने अंगीकार करने कि लगातार प्रेरणा देते हुए भक्तों से मानवता के प्रति प्रतिवर्ष सहयोग करवाते थे 


वे जरुरत मंद को सिलाई मशीन के साथ आर्थिक मदद मनी ऑर्डर के साथ करवाते थे आज ऐसे महान तपस्वीराज श्री अभय मुनी म सा के 7 वीं पुण्यतिथि पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संध के सदस्यों द्वारा कायमी तिथि पर दरिद्र नारायण को भोजन कराया गया इस मौके पर जैन कांफ्रेंस आत्म ध्यान योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय मंत्री संदीप रांका, पुर्व र अध्यक्ष बंसतीलाल चपडोद, अन्नश्रेत्र जन कल्याण समिति के अध्यक्ष चंदप्रकाश ओस्तवाल, जैन दिवाकर नवयुवक मंडल के अध्यक्ष आकाश जैन, वरिष्ठ सुजानमल ओरा, अजीत रांका, शांतिलाल डांगी, सुरेंद्र मेहता, सुरेंद्र सुराणा कवर सा, राहुल रांका, मयूर कोठारी, मनोहर पांचाल, मंडलोई जी, मृदुल चपडोद

गौतम रांका, सरदारमल धारीवाल मैनेजर अशोक पोरवाल एवं श्रीमति मनीषा रांका आदि उपस्तिथ थे।

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