मुकेश खेड़े
बड़वाह चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि जिसे गणगौरी तीज भी कहा जाता है पर शनिवार को अलसुबह माता की बाड़ी खुलने के साथ पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। सराफा बाजार स्थित दादू पंडित, पंडित रमेश जोशी एवं पंकज शर्मा के घर माता की बाड़ी जैसे ही खोली गई वैसे ही महिलाएं अपने पति के साथ माता के जवारों की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि की कामनाए करने के लिये उमड़ पड़ी।
दोपहर 12 बजे श्रद्धालु रथ सजाकर ढोल-ताशों के साथ बाड़ी में पहुंचे, यहां माता के जवारों को रथ में विराजित कर महिलाएं गणगौर माता के रथ को अपने-अपने घर ले गई। दर्शन,पूजन का यह सिलसिला अगले तीन दिनों तक चलता रहेगा। सोमवार को गणगौर घाट पर ज्वारो के विसर्जन के साथ यह पर्व समाप्त होगा। दादू पंडित ने बताया की आज सुबह चार बजे से ही दर्शन हेतू बाड़ियो के द्वार खोले गये।इस दौरान महिला एवं पुरुषो ने जोड़े से उपस्थित होकर माता का पूजन किया। पूजन के पश्चात वे दम्पत्ति जिन्होंने बाड़ी में गणगौर माता की मुठ विराजित की, वे सुबह ढ़ोल-ढमाके के साथ माता की बाड़ी पहुंचे एवं मेहमान के रूप में गणगौर माता को ससम्मान अपने घर लेकर गए।
घरों में दिनभर महिलाओ द्वारा रणुबाई एवं धनियार राजा का जोड़े से सामूहिक पूजन कर झालारिया दिया जाएगा। रविवार को मन्नतधारी जोड़े माता के रथ बौड़ाएंगे। इस दिन ये अपने घर में माता का पूजन कर पानी पिलाएंगे। इस अवसर पर विशेष भोज का आयोजन भी किया जाता है। शाम को माता का जगराता होगा। सोमवार को धूमधाम से गणगौर घाट पर जवारो के विसर्जन के साथ माता को विदाई दी जाएगी।उल्लेखनीय है कि गणगौर का पर्व पूरे नगर में बेहद श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है।शहरों के साथ विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में तो इस पर्व की बेहद धूम रहती है।तीन दिवसीय इस पर्व पर ग्रामीण अपने कार्य से विरत रहकर माता की भक्ति के लीन रहते है।

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