इंदौर। नवकार महामंत्र के प्रथम दिवस पर गच्छाधिपति श्री नित्यसेनसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि “नवकार महामंत्र के 68 अक्षरों में अनंत आध्यात्मिक शक्ति समाहित है।” प्रवचन में प्रथम अक्षर ‘णमो’ के गूढ़ अर्थ को समझाते हुए उन्होंने विनय, सरलता और अहंकार त्याग को आत्मकल्याण का आधार बताया।
परम पूज्य विद्वद्रत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि नवकार केवल मंत्र नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, विनय और कर्मनिर्जरा की दिव्य साधना है। उन्होंने अष्टापद तीर्थ की भावयात्रा कराते हुए भगवान आदिनाथ, भरत चक्रवर्ती और गौतम स्वामी से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से तीर्थ निर्माण, आराधना और गुरु-कृपा की महिमा बताई।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के वास्तविक शत्रु बाहर नहीं, बल्कि भीतर छिपे क्रोध, मान, माया, लोभ, राग-द्वेष और अहंकार हैं। नवकार की आराधना इन विकारों पर विजय पाने की शक्ति प्रदान करती है।
प्रवचन में मालवा, रिंगणोद, नवकार पार्श्वनाथ, मोहनखेड़ा, हत्थुंडी, तालनपुर और नांदियाजी तीर्थों की आध्यात्मिक महिमा का स्मरण किया गया। रिंगणोद में पुण्यसम्राट के ऐतिहासिक चातुर्मास तथा वर्तमान में साध्वी श्री विज्ञानलताश्रीजी म.सा. की निश्रा में चल रही नवकार आराधना का भी उल्लेख हुआ।
धर्मसभा में सिद्धि तप के 54 तपस्वियों की आराधना जारी रही, जबकि गुरुराज द्विशताब्दी तप आराधना के अंतर्गत 36 भाई-बहनों ने पारणा किया। विशेष तपस्वियों में चंदनबालाजी बडेरा 32 उपवास, जयंतीलालजी वेद 23 उपवास, साध्वी बालसाध्वी राजर्षिलताश्रीजी 22 उपवास तथा पूर्वी मुथा 19 उपवास की तपस्या कर रहे हैं।
आज दादा गुरुदेव एवं पुण्यसम्राट की आरती का लाभ सुनीलजी राजमलजी कापड़िया परिवार ने लिया। नवकार आराधना का लाभ रांका परिवार, इंदौर ने लिया। धर्मसभा में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। संचालन महेंद्र बागवाला, आभार धनराज संघवी तथा सूचनाएं नीरज सुराणा ने दीं।
कल कुमारपाल महाराज का परिवार प्रातः 9:09:09 बजे केशरी वाटिका से प्रवचन मंडप की ओर गाजे-बाजे के साथ प्रवेश करेगा। इसके लाभार्थी सुरेशजी मदनलालजी अक्षयजी मेहता, देसाईवाले रहेंगे।


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