शौचालय के पीछे जमा गंदा पानी, दुर्गंध से श्रद्धालु परेशान; श्री अनिल दसेड़ा
नाहरू मोहम्मद दबंग देश
जावरा। सावन का पवित्र महीना... मंदिरों में भगवान शिव के जयकारे... दर्शन के लिए उमड़ते श्रद्धालु और दूसरी ओर जावरा के प्राचीन एवं प्रमुख शंकर मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर पसरी गंदगी। बारिश होते ही नालियों का गंदा पानी मंदिर परिसर में पहुंच रहा है। शौचालय के पीछे गंदा पानी जमा होने से बदबू का आलम है और श्रद्धालुओं को इसी दुर्गंध व गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सवाल सीधा है—जब सावन में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ना तय है, तो फिर मंदिर की जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था पहले से दुरुस्त क्यों नहीं की गई?
सोमवार को मंदिर दर्शन के दौरान मंदिर के पुजारी जगदीश ने ग्राउंड फ्लोर की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान नालियों का पानी मंदिर के ग्राउंड फ्लोर तक पहुंच जाता है। शौचालय के आसपास और पीछे पानी जमा होने से गंदगी के साथ दुर्गंध भी फैलती है। सावन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर परिसर की यह स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
पहले भी सामने आ चुकी है समस्या, फिर क्यों नहीं हुआ समाधान?
मंदिर की अव्यवस्था का यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा द्वारा पूर्व में भी मौके का निरीक्षण किया जा चुका है। समस्या जिम्मेदारों के संज्ञान में आने के बावजूद बारिश के दौरान नालियों का पानी मंदिर में प्रवेश करने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब समस्या दिखाई दे रही है, जिम्मेदारों को इसकी जानकारी भी है, तो फिर स्थायी निराकरण के लिए कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या हर बारिश में मंदिर परिसर में गंदा पानी भरने का इंतजार किया जाएगा ।
और उसके बाद केवल पानी निकालने की व्यवस्था की जाएगी?
मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर नालियों का गंदा पानी जमा होना महज असुविधा नहीं, बल्कि स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार विभाग को यह पता लगाना चाहिए कि आखिर नालियों का पानी मंदिर परिसर में प्रवेश कैसे कर रहा है। केवल पानी निकालकर समस्या को दबाने के बजाय जल निकासी की ऐसी स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे बारिश के दौरान गंदा पानी मंदिर परिसर में
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान भोलेनाथ के दरबार में गंदा पानी और दुर्गंध किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मंदिर परिसर की नियमित सफाई के साथ जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करना जिम्मेदार विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सवाल अब प्रशासन से है—सावन के इस पवित्र महीने में जब श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, तब क्या मंदिर परिसर को गंदे पानी से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि प्रशासन और नगर पालिका इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए अस्थायी सफाई नहीं, बल्कि स्थायी जल निकासी समाधान सुनिश्चित करेंगे।

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