कल 12 अगस्त कंधे पर कावड़, हाथों में तिरंगा; दंगवाड़ा पहुंचेगी शिवभक्तों की टोली
दबंग देश अनिल पेन्टर
गौतमपुरा । श्रावण मास की हरियाली अमावस्या पर गौतमपुरा में 16 वर्षों से चली आ रही कावड़ यात्रा की परंपरा इस वर्ष भी जारी रहेगी। कल 12 अगस्त को अति प्राचीन श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर से श्री बोरेश्वर महादेव मंदिर दंगवाड़ा तक भव्य कावड़ एवं कलश यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में गौतमपुरा, रूणजी और नयापुरा क्षेत्र के महिला-पुरुष शामिल होंगे। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। श्री अचलेश्वर महादेव कावड़ यात्रा समिति के ओम मेवाड़ा, सोहनलाल असावरा, अनिल पेन्टर कुशवाह, पप्पू माली,अब्बु अभय भाटी एवं घनश्याम राठौड़ ने बताया कि कल 12 अगस्त को सुबह 10 बजे श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर उकाला से जल भरकर कावड़ एवं कलश पूजन के बाद यात्रा शुरू होगी। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्री बोरेश्वर महादेव मंदिर दंगवाड़ा पहुंचेगी। यहां कावड़ में लाए गए जल से भगवान बोरेश्वर महादेव का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहेगी।
कावड़ यात्रा की अनूठी पहचान
इस यात्रा की सबसे खास बात इसकी पूजन परंपरा है। सामान्य कावड़ यात्राओं में श्रद्धालु जल भरकर सीधे यात्रा शुरू करते हैं, लेकिन यहां कावड़ उठाने से पहले भगवान अचलेश्वर महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद अचलेश्वर से जल भरकर कावड़ की पूजा की जाती है। कावड़ के साथ भगवा ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का भी पूजन किया जाता है। इसके बाद ही कावड़ यात्रा प्रारंभ होती है।आयोजकों के अनुसार धार्मिक आस्था के साथ तिरंगे का पूजन देश के प्रति सम्मान, एकता और सामाजिक समरसता की भावना को दर्शाता है। इसी परंपरा के कारण इस कावड़ यात्रा की क्षेत्र में अलग पहचान बनी हुई है।
मातृशक्ति संभाल रही आयोजन की कमान
कावड़ एवं कलश यात्रा को लेकर महिला मंडल के सदस्य तैयारियों में जुटे हैं। महिला श्रद्धालुओं की भागीदारी को लेकर विशेष रूप से कलश यात्रा की तैयारियां की जा रही हैं। आयोजकों ने गौतमपुरा, रूणजी, नयापुरा सहित आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में यात्रा में शामिल होने की अपील की है। 16 वर्ष पुरानी परंपरा में इस बार भक्ति के साथ तिरंगे को सम्मान देने की पूजन परंपरा यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहेगी।


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