आदित्य यादव दबंग देश
सारनी (पाथाखेड़ा) | वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) के पाथाखेड़ा क्षेत्र में शोषण के खिलाफ मजदूरों की आवाज अब थाने की चौखट तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीनों से पसीने की कमाई (वेतन) न मिलने से आक्रोशित 176 ठेका मजदूरों ने गुरुवार को सारनी थाने का घेराव किया और भ्रष्ट ठेकेदारों पर FIR दर्ज करने की लिखित मांग की।
शोषण की इंतहा: घरों में चूल्हा जलना हुआ मुश्किल
मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदारों और प्रबंधन की तानाशाही के कारण उनके परिवारों की कमर टूट गई है।
आर्थिक तंगी: 3 महीने से वेतन नहीं मिला, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर का राशन बंद होने की कगार पर है।
विफल वार्ता: 4 फरवरी से जारी मान-मनौव्वल और प्रबंधन को दिया गया 7 दिन का अल्टीमेटम बेअसर रहा।
मजदूर नेताओं का हुंकार: "जब तक भुगतान नहीं, तब तक काम नहीं"
श्रमिक नेता प्रदीप नागले, संतोष देशमुख और मनोज पवार ने दो-टूक शब्दों में कहा कि क्षेत्रीय महाप्रबंधक (APM) ललित कुमार तिर्की से कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
"मजदूरों का खून-पसीना एक करने के बाद भी अगर उन्हें वेतन के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो यह प्रबंधन की सबसे बड़ी विफलता है।" — श्रमिक संगठन
आंदोलन की अगली रणनीति:
हड़ताल के सातवें दिन मजदूरों ने साफ कर दिया है कि:
जब तक पाई-पाई का हिसाब बैंक खातों में नहीं आता, भूमिगत खदानों में काम बंद रहेगा।
अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो यह प्रदर्शन 'आमरण अनशन' (भूख हड़ताल) में तब्दील हो जाएगा।

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