पटवारी नगरपालिका कर्मचारियों की साठगांठ से प्राइवेट भूमि पर पट्टे, पुनः सर्वे और जांच की मांग
संवाददाता कन्हैया नाथ दबंग देश
बुधनी। नगर परिषद बुधनी में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत किए गए सर्वे और पट्टा वितरण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार योजना के तहत करीब 500 लोगों ने आवेदन किए थे, जबकि शासन के नियमों के अनुसार केवल उन्हीं आवेदकों को प्राथमिकता दी जानी थी जिनके पास वैध पट्टा या रजिस्ट्री उपलब्ध थी। अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ दिलाने के नाम पर जिन आवेदकों के पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे, उनके लिए पट्टे जारी करने हेतु सर्वे कराया गया, लेकिन आरोप है कि इस सर्वे में नगरपालिका कर्मचारियों और पटवारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं और निजी भूमि पर भी पट्टे देने की कार्रवाई कर दी गई। इससे नगर में भारी आक्रोश व्याप्त है।
जानकारी अनुसार वार्ड क्रमांक 10 बुधनी घाट स्थित खसरा नंबर 180 पर ज्योति पांचाल पिता शंकरलाल बिजोरिया के नाम पट्टे की कार्रवाई कर उन्हें पात्र घोषित किया गया है, जबकि इसी खसरा नंबर पर वास्तविक हकदारों के नाम खरे में दर्ज हैं। संबंधित परिवारों का आरोप है कि उक्त मकान में वर्षों से उनका पूजन और निवास चला आ रहा है, इसके बावजूद पटवारी और नगरपालिका कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ज्योति पांचाल के नाम पट्टा बना दिया और सूची नगर पालिका में चस्पा कर दी गई है, जिसकी आपत्ति की तिथि 22 जनवरी निर्धारित की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी बुधनी में कई स्थानों पर प्राइवेट भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनकी शिकायतें लंबित हैं। अब एक बार फिर गलत सर्वे सामने आने से पूरे पट्टा वितरण पर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पालिका द्वारा प्रकाशित आपत्ति सूची में क्रमांक 252 पर ठाकुरदास शर्मा पिता मदनलाल तथा क्रमांक 254 पर उनके पुत्र जितेश कुमार को खसरा नंबर 172 पर दर्ज दिखाया गया है, जबकि वास्तविक मकान खसरा नंबर 183 पर अन्य लोगों के नाम दर्ज है। आरोप है कि सड़क की दिशा में आने वाली भूमि पर फर्जी तरीके से ठाकुरदास और उसके पुत्र के नाम पट्टा दिखाया गया, जबकि वास्तविक हकदारों का रास्ता उसी भूमि से होकर जाता है।
खसरा नंबर 180 पर दर्ज परिवारों ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि ज्योति पांचाल, उनके पति या ससुर का उक्त भूमि से कोई संबंध नहीं है और पूरी कार्रवाई फर्जी तरीके से की गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि पूरे बुधनी नगर में किए गए सर्वे और पट्टा वितरण की गहराई से जांच की जाए तो कई फर्जी पट्टों और प्रधानमंत्री आवास योजना के गलत लाभार्थियों का खुलासा हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि पट्टा सर्वे दोबारा कराया जाए और यह कार्य किसी अन्य नगर पालिका तथा दूसरी तहसील के पटवारियों से कराया जाए, ताकि निष्पक्ष रूप से वास्तविक पात्र लोगों को ही योजना का लाभ मिल सके। साथ ही दोषी पटवारी और नगर पालिका कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।


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