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सिद्धचक्र महामण्डल विधान की आराधना के साथ शुरु हुआ चातुर्मास Chaturmas started with the worship of Siddhachakra Mahamandal Vidhan

 सिद्धचक्र महामण्डल विधान की आराधना के साथ शुरु हुआ चातुर्मास


वर्षायोग कलश स्थापना की बोली 


थांदला। दिगम्बर जैन समाज मे 13 वर्षों बाद परम् पूज्य गणाचार्य विरागसागरजी महाराज एवं परम् पूज्य आचार्य विभवसागरजी की आज्ञानुवर्ती विदुषी शिष्या 105 क्षुल्लिका ह्रीम श्री माताजी एवं सिद्धश्री माताजी का मंगल वर्षा योग (चातुर्मास) थांदला की धर्म धरा पर मिलते ही सकल संघ में हर्ष का वातावरण निर्मित हो गया है। जानकारी देते हुए संघ अध्यक्ष अरुण (बाला) कोठारी व सचिव शशिकांत पंचोली ने बताया कि 13 वर्ष बाद दिगम्बर जैन समाज मे धर्म की प्रभावना के निमित्त इस चातुर्मास की शुरुआत सिद्ध चक्र महामण्डल विधान की आराधना आष्टानिका महापर्व व मंगल कलश स्थापना के साथ हुई। 


सकल संघ ने शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए श्रीजी की रथ यात्रा जैन मंदिर से निकलकर नगर के प्रमुख मार्ग से होती हुई त्यागी भवन पर सम्पन्न हुई। इस अवसर पर प्रियांक मेहता, इन्द्रवर्धन मेहता, कल्पना मेहता व देवेंद्र मेहता ने अष्टम तप (अट्ठाई) की आराधना की वही अनेक श्रावक श्राविकाओ ने भी विधान तप आराधना के साथ मनाया। आयोजन में संघ के कोषाध्यक्ष इन्द्रवर्धन मेहता, पारस मेहता, शैलेश मेहता, मोहन कोठारी, महावीर मेहता, देवेंद्र भीमवत, शीतल बोबड़ा, अभिषेक मेहता, अनूप मिंडा, विजय भीमावत, महिला मंडल अध्यक्ष सारिका मेहता, ममता पिण्डरमा, सपना मेहता, उषा मेहता, ज्योतिबाला पिण्डारमा, ज्योत्सना मिंडा, मोनिका, चेतना, राखी आदि की उल्लेखनीय भूमिका रही।

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