इंदौर। नगर निगम का जोन क्रमांक 14 इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अब यह चर्चा आम है कि क्या निगम के जिम्मेदार 'गलतियों का पुतला' बन चुके हैं या फिर पर्दे के पीछे खरीद-फरोख्त का कोई बड़ा खेल चल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
द्वारकापुरी जैसी घनी बस्ती वाली कॉलोनी में निगम की मनमानी का एक चौंकाने वाला नमूना सामने आया है। यहाँ एक ही संपत्ति का मूल खाता (Original Account) मौजूद होने के बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर दूसरा 'पेकी भाग' (Partial/Sub-account) का खाता खोल दिया गया है।
अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) और बिल कलेक्टर की आपसी साठगांठ से यह खेल खेला जा रहा है। जानकारों का मानना है कि बिना किसी ठोस आधार और सत्यापन के दूसरा खाता खोलना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
बड़ा सवाल: क्या यह महज एक मानवीय भूल है, या फिर भ्रष्टाचार के जरिए किसी खास को फायदा पहुँचाने की कोशिश?
निगम प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से न सिर्फ राजस्व की जटिलताएं बढ़ेंगी, बल्कि आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा भी कम हो रहा है।
*जल्द ही इस मामले का पूरा खुलासा और विस्तृत खबर 'दबंग देश' पर हमारे पाठकों तक पहुँचाई जाएगी।*

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