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20 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा, संत-विद्वानों ने जारी किया शास्त्र सम्मत निर्णय Dussehra will be celebrated on October 20, saints and scholars have issued a scriptural decision.


 नवीन आड़े दबंग देश

बुरहानपुर/शारदीय नवरात्रि के पर्व पर तिथियों को लेकर चल रहे असमंजस को दूर करते हुए बुरहानपुर के संत, पुजारियों और ज्योतिषविदों ने एक स्पष्ट और सर्वसम्मत निर्णय लिया है। स्थानीय उदासीन आश्रम (बड़ा अखाड़ा) में आयोजित संत पुजारी विद्वत परिषद की बैठक में यह तय किया गया कि इस वर्ष नगर में विजयादशमी (दशहरा) का पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। बैठक में शामिल विद्वानों ने सनातन समाज से एकजुटता बनाए रखने और प्रशासनिक व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।

विद्वत परिषद का आधिकारिक निर्णय और तिथियों का गणित

​बैठक में पंचांगीय गणना और शास्त्रों के गहन विश्लेषण के बाद आधिकारिक घोषणा पंडित अवधेश पांडे द्वारा की गई। परिषद द्वारा तय की गई तिथियों का विवरण इस प्रकार है:

​18 तारीख: सप्तमी तिथि मनाई जाएगी।

​19 तारीख: अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग रहेगा। जिन परिवारों या पंडालों में सायंकाल (संध्या के समय) नवमी पूजन की परंपरा है, वे 19 तारीख की शाम को यह अनुष्ठान संपन्न करेंगे।


​20 तारीख: इस दिन नवमी और दशहरा दोनों का प्रभाव रहेगा। जिन स्थानों पर प्रातःकाल नवमी पूजन का विधान है, वे 20 तारीख की सुबह पूजन करेंगे।


​परिषद के अनुसार, शास्त्रों में 'उदित तिथि' को विशेष मान्यता दी जाती है। इस वर्ष 20 तारीख को दोपहर 2:02 बजे से विजय मुहूर्त का शुभारंभ हो रहा है, यही कारण है कि विजयादशमी का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

माता प्रतिमा विसर्जन को लेकर विशेष दिशा-निर्देश

​शास्त्र सम्मत विधान का हवाला देते हुए ठाकुर प्रियांक सिंह ने शहर की सभी माता पंडाल उत्सव समितियों से आग्रह किया है कि प्रतिमाओं का विसर्जन विजयादशमी प्रारंभ होने से पूर्व संपन्न हो जाना चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए समितियों से अपील की गई है कि वे 20 तारीख की दोपहर 2:00 बजे से पहले माता की प्रतिमाओं का विसर्जन पूर्ण कर लें।

प्रशासन और समाज के नाम संदेश

​महंत स्वामी पुष्कारानंद जी महाराज ने बुरहानपुर के समस्त हिंदू समाज से यह आह्वान किया है कि पूरे नगर में पर्व एक ही तिथि और समय पर मनाए जाएं। इससे न केवल धार्मिक मर्यादा और अनुशासन सुरक्षित रहेगा, बल्कि समाज में किसी भी तरह का संशय या भ्रम नहीं फैलेगा। संतों ने यह भी रेखांकित किया कि एक ही दिन पर्व और विसर्जन होने से स्थानीय पुलिस तथा प्रशासन को भी कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन में काफी सुविधा मिलेगी।


​बैठक में महंत स्वामी पुष्कारानंद जी महाराज, पंडित अवधेश पांडे, बाल्या महाराज, ठाकुर प्रियांक सिंह, प्रभंजन मुनी, मुकेश डालमिया, पंडित सुदीप रघुवंशी और शर्मा जी सहित शहर के कई गणमान्य संत, पुजारी और विद्वतजन उपस्थित रहे।

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