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पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद के आह्वान पर 11 मार्च से सकल जैन समाज में एक साथ शुरू होगी वर्षीतप की आराधनाOn the call of Pujya Shri Dharmdas Gan Parishad, the worship of Varshitap will start simultaneously in the entire Jain community from March 11.

 

जैनियों के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान से जुड़ा है तप का इतिहास

थांदला। अहिंसा संयम व तप प्रधान जैन धर्म में स्थवीर गुरुभगवंतों ने वर्षीतप का महत्व बताया है। ऐसे में पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद द्वारा डूंगर मालवा के भक्तों के भगवान के रूप में प्रसिद्ध जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. "अणु" के जन्म शताब्दी पर गण प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के निर्देश व उनके आशीर्वाद से उनके सानिध्य में अष्ट वर्षीय आराधना के अंतर्गत तृतीय वर्ष में वर्षीतप आराधना के साथ मनाया जा रहा है। 


इस अवसर पर विस्तृत जानकारी देते हुए गण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत भंसाली, महामंत्री शैलेश पीपाड़ा, मीडिया प्रभारी पवन नाहर ने बताया कि पूज्य गुरुभगवंतों के उपकारों को याद करने के साथ अपनी आत्मा का कल्याण करने के लिए जैन आगमों में तप का विधान बताया गया है।ऐसे में डूंगर मालवा सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि अन्य प्रांतों में एक साथ सामूहिक वर्षीतप की आराधना धर्म की आदि करने वालें प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव के अंतराय कर्मोदय के करण 13 माह (400 दिन) तक निराहार रहने व अक्षय तृतीया पर हस्तिनापुर में श्रेयांस कुमार के हाथों निर्दोष इक्षुरस से पारणें करने पर उनके इस प्रथम तप के रुप में उनके ही जन्म व दीक्षा कल्याणक दिवस चैत्र कृष्णा अष्टमी (11 मार्च 2026) से प्रारंभ हो रही है। गण परिषद के निर्णय अनुसार इस बार वर्षीतप की आराधना में आराधक अपने शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार एक दिन उपवास, आयंबिल, निवि, एकासन और दूसरे दिन पारणा इस प्रकार वैकल्पिक तप की आराधना कर आगामी वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) पर तप पूर्णाहुति पर पूज्य श्री धर्मदास गण नायक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी के सानिध्य में तप आलोचना व दोष शुद्धि करेंगें। उल्लेखनीय है कि तप के महत्व को देखकर न केवल पूज्य श्री धर्मदास गण में ही नही अपितु सकल श्वेतांबर (स्थानकवासी, मूर्तिपूजक व तेरापंथ) व दिगम्बर जैन समाज में अनेक तपस्वी वर्षीतप की आराधना करेंगें।

थांदला में 108 आराधक शुरू करेंगें वर्षीतप

गण परिषद के आह्वान पर थांदला नगर में भी वर्षीतप की आराधना का भव्य माहौल निर्मित हो गया है। जानकारी देते हुए संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया, सचिव हितेश शाहजी, नवयुवक मंडल अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा सचिव प्रांजल भंसाली ने बताया कि यह भूमि पूज्य गुरुदेव की जन्मभूमि है ऐसे में यहाँ साधु संतों का सानिध्य निरतंर मिलता रहता है वही गण नायक बुद्धपुत्र पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी की आज्ञानुवर्ती महासती पूज्याश्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा - 4 यहाँ सकारण लंबे समय से विराजित है उनकी प्रेरणा से संघ व नवयुवक मण्डल के पदाधिकारियों ने घर-घर जाकर वर्षीतप आरधकों के नाम लिखे ऐसे में उपवास तप की सामूहिक आराधना के लिए लगभग 108 नाम आगे आये है वही एकासन आदि विविध विकल्पों से वर्षीतप करने वालें तपस्वियों ने भी अपनी सहमति दी है। इनमें उपवास के वर्षीतप आराधकों के सामूहिक पारणें श्रीसंघ द्वारा मर्यादित द्रव्य व्यवस्था के साथ स्थानीय महावीर भवन पर करवाये जायेंगें जिनमें दानदाता अपने परिजनों की स्मृति आदि मांगलिक पर्व तिथि के लिये 15 हजार रुपये प्रति पारणा के मान से राशि श्रीसंघ में जमा कराकर तप अनुमोदना का लाभ ले सकेंगें। तप अनुमोदना में भी बढ़चढ़ कर तपस्वियों के साथ अन्य परिवारों ने आगे आकर क्रमशः 1 से लेकर 10 परणों का लाभ लेकर तो कुछ विशिष्ट दानदाता लाभार्थी भी अर्थ सहयोग भी कर रहे है।

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