Top News

दो मासक्षमण तपस्वियों का बहुमानHonor of two capable ascetics

 दो मासक्षमण तपस्वियों का बहुमान

राखी व्होरा व सूरजमल श्रीमाल के मासक्षमण तप के पारणें

तप करने में भी सभी जीव स्वतंत्र नही है - चन्द्रेशमुनि

थांदला। मासक्षमण तप अभिनन्दन के अवसर दुर्लभ ही होतें है लेकिन इस चातुर्मास काल में 4 मासक्षमण तप पूर्ण हो चुके है। थांदला नगर में आज राखी नितेश व्होरा तो एक दिन पूर्व श्रावक वर्ग से एक मात्र तपस्वी सूरजमल श्रीमाल के दीर्घ मासक्षमण तप की पूर्णाहुति पर जयकार यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा तपस्वियों के निज निवास तप व तपस्वी के जयकारें लगाते हुए स्थानीय पौषध भवन पहुँची जहाँ विराजित संत पूज्य श्री चन्द्रेशमुनिजी म. सा. ने तप अनुमोदना करते हुए कहा कि नरक तिर्यंच के जीव पराधीन है इसलिए तपस्या करने में स्वतंत्र नही है वही मनुष्य में भी जीव आदि व्याधि उपाधि से पीड़ित है इसलिए तपस्या करने में वे भी परतंत्र है। जीव में जब धर्म व ज्ञान वृद्धि  होती है तो वह मोक्ष मार्ग का अनुसरण करता हुआ तपस्या में प्रवृत्त होता है। उन्होने कहा कि सम्यग तप जीव को देवलोक के सुख तो दिलाता ही है वही एक से लेकर 5 भव में मोक्ष का शाश्वत सुख भी दिला देता है। पूज्य श्री सुयशमुनिजी म.सा. ने कहा कि तपस्या करने से विपुल कर्मों की निर्जरा होती है। पुण्योदय से जीव को अनुकूलता मिलती है, यदि वह इसका लाभ तपस्या करने में उठा लेता है तो मनुष्य जन्म को सफल बना लेता है। इस अवसर पर तप अनुमोदना में स्तवन के माध्यम से भाव अभिव्यक्त करते हुए पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने कहा कि जिनका जीवन सरल होता है व धर्म की ललक जिनमें होती है 

थांदला। मासक्षमण तप अभिनन्दन के अवसर दुर्लभ ही होतें है लेकिन इस चातुर्मास काल में 4 मासक्षमण तप पूर्ण हो चुके है। थांदला नगर में आज राखी नितेश व्होरा तो एक दिन पूर्व श्रावक वर्ग से एक मात्र तपस्वी सूरजमल श्रीमाल के दीर्घ मासक्षमण तप की पूर्णाहुति पर जयकार यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा तपस्वियों के निज निवास तप व तपस्वी के जयकारें लगाते हुए स्थानीय पौषध भवन पहुँची जहाँ विराजित संत पूज्य श्री चन्द्रेशमुनिजी म. सा. ने तप अनुमोदना करते हुए कहा कि नरक तिर्यंच के जीव पराधीन है इसलिए तपस्या करने में स्वतंत्र नही है वही मनुष्य में भी जीव आदि व्याधि उपाधि से पीड़ित है इसलिए तपस्या करने में वे भी परतंत्र है। जीव में जब धर्म व ज्ञान वृद्धि  होती है तो वह मोक्ष मार्ग का अनुसरण करता हुआ तपस्या में प्रवृत्त होता है। उन्होने कहा कि सम्यग तप जीव को देवलोक के सुख तो दिलाता ही है वही एक से लेकर 5 भव में मोक्ष का शाश्वत सुख भी दिला देता है। पूज्य श्री सुयशमुनिजी म.सा. ने कहा कि तपस्या करने से विपुल कर्मों की निर्जरा होती है। पुण्योदय से जीव को अनुकूलता मिलती है, यदि वह इसका लाभ तपस्या करने में उठा लेता है तो मनुष्य जन्म को सफल बना लेता है। इस अवसर पर तप अनुमोदना में स्तवन के माध्यम से भाव अभिव्यक्त करते हुए पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने कहा कि जिनका जीवन सरल होता है व धर्म की ललक जिनमें होती है

वही गुरुवाणी को आत्मसात कर तपस्या करता है। दोनों तपस्वियों ने पँचरगी में नाम लिखाकर अपना तप आगे बढाया और आज मासक्षमण करके जिन शासन व अपने कुल का गौरव बढ़ाया है, पूज्या श्री ने उनके तप की खूब खूब अनुमोदना की। इस अवसर पर व्होरा व श्रीमाल परिवार व रिश्तेदारों ने भी अपनी भावना व्यक्त करते हुए तप व तपस्वियों के गुणगान किये। श्रीसंघ अध्यक्ष ने चातुर्मास काल से ही तपस्या में लीन सभी तपस्वियों का संघ कि ओर से शाब्दिक गुणगान किया धर्म सभा का संचालन सचिव प्रदीप गादिया ने किया।

संघ द्वारा तपस्वियों का बहुमान 

तप अनुमोदना कि जानकारी देते हुए संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि जिन शासन व संघ का गौरव बढाने वालें तपस्वियों का श्रीसंघ के साथ वीरमाता चंद्रकांता रुनवाल, प्रकाशचंद्र घोड़ावत परिवार, तारा बहन भंसाली परिवार, कनकमल गादिया परिवार, समरथमल एवं नगीनलाल शाहजी परिवार द्वारा भी बहुमान किया जा रहा है। इसी कड़ी में सूरजमल श्रीमाल, राखी बहन व्होरा के साथ 12 बेला व 1 तेले तप की आराधना करने पर श्रीमती रीता व्होरा, चौलें-चौलें तप के तपस्वी कु. प्रिया व्होरा व अमिता प्रदीप गादिया का भी श्रीसंघ द्वारा तप की बोली लगाकर बहुमान किया गया। तप अभिनन्दन में मूर्तिपूजक संघ, तेरापंथ संघ, रोटरी क्लब व नगर परिषद अध्यक्ष बंटी डामोर, विश्वास सोनी आदि के साथ अन्य संस्थाओं द्वारा भी बहुमान किया जा रहा है। सभी तपस्वियों को श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष नगीनलाल शाहजी, महेश व्होरा, रमेश चौधरी, भरत भंसाली, ललित जैन नवयुवक मंडल पदाधिकारी रवि लोढ़ा, अखिलेश श्रीमाल, संदीप शाहजी, सुधा शाहजी, अनुपमा श्रीमाल, किरण श्रीमाल आदि द्वारा संघ की माला पहनाकर शाल ओढ़ाई गई। दोनों ही परिवार द्वारा तप अनुमोदना में चौवीसी का आयोजन साधर्मिक सेवा लाभ लेते हुए क्रमशः स्वामीवत्सल्य का आयोजन किया गया व प्रवचन प्रभावना भी वितरित की गई।

Post a Comment

Previous Post Next Post