विभाग का सेफ city बनाने का दावा, अधिकारी ही रहे नदारद, एनजीओ और Employee पर महिलाओ के सुरक्षा की जिम्मेदारी
गजेन्द्र माहेश्वरी
नीमच :- महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को 3 दिन तक विभिन्न गतिविधियों के साथ मना रहे हैं। वही देखने में आया है कि विभाग का कार्यक्रम लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता भरे रवैया की भेंट चढ़ रहा है। मंगलवार को शहर के बस स्टैंड पर सेफ सिटी ऑडिट का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा किया गया था।
इस कार्यक्रम में विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से वन स्टॉप सेंटर और पुलिस विभाग के अधिकारियों को शामिल कर महिलाओं से चर्चा और उनको अपराधों की जानकारी देने और पार्टी यात्री बसों में यात्रा करने पर किसी तरह कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनने की जानकारी देना थी। साथ ही संवेदनशील एरिया में जाकर महिलाओं और बालिकाओं से चर्चा करना थी शहर में सेफ सिटी का आयोजन तो हुआ लेकिन इस कार्यक्रम में महिला बाल विकास के डीपीओ वन स्टॉप सेंटर की हेड और महिला डेस्क की प्रभारी नदारद रही। इस ऑडिट में एनजीओ और विभाग के कर्मचारियों को मौके पर बुलाया गया और इनके द्वारा ऑडिट करवाई गई।
अधिकारियों की मौजूदगी नहीं होने के कारण ऑडिट की सही तरीके से समीक्षा नहीं हो पाई और ऑडिट बैनर पोस्टर लगाने तक ही सीमित रह गई। एनजीओ के अधिकारियों एनजीओ के सदस्य और विभागों के कर्मचारी बस स्टैंड पर पोस्टर और चुनिंदा महिलाओं से चर्चा कर ही अपने अपने विभाग की ओर लौट गए। लेकिन उन्हें यह भी पता नहीं था कि शहर में महिलाओं और बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ व अन्य प्रकरण होने वाले संवेदनशील क्षेत्र कौन-कौन से हैं। वह बस स्टैंड पर ही ऑडिट की खानापूर्ति कर रवाना हो गए। अब ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों के महिलाओं एवं बालिकाओं के रक्षा करने के दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित और सिद्ध होते नजर आए।
Post a Comment