आगर प्रवास के दौरान हेलीपेड पर डॉ. मोहन यादव को सौंपा ज्ञापन, प्रशासन-मीडिया के बीच बढ़ती संवादहीनता का मुद्दा उठाया
दैनिक दबंग देश अशोक परीहार
आगर-मालवा। जिले में कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना की कार्यशैली को लेकर पत्रकारों में बढ़ती नाराजगी अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है। प्रशासन और मीडिया के बीच पिछले कई दिनों से चल रहे टकराव और कथित संवादहीनता के बीच रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगर प्रवास के दौरान पत्रकारों ने हेलीपेड पर उन्हें ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को कलेक्टर की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए उन्हें आगर-मालवा से हटाने की मांग की।
पत्रकारों का आरोप है कि कलेक्टर की कार्यशैली में संवाद और समन्वय का अभाव नजर आ रहा है। प्रशासन और मीडिया के बीच जिस तरह का संवाद एवं समन्वय होना चाहिए, वह वर्तमान में दिखाई नहीं दे रहा है। इससे जिले में प्रशासन और पत्रकारों के बीच दूरी लगातार बढ़ने की स्थिति बनी है।
बैठक में पारित हो चुका है निंदा प्रस्ताव
कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर जिले के पत्रकारों की बैठक भी आयोजित की गई थी। इसमें पत्रकारों ने कलेक्टर के कथित उपेक्षापूर्ण कार्यव्यवहार, संवादहीनता और मीडिया के साथ समन्वय के अभाव को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में उपस्थित पत्रकारों ने सर्वसम्मति से कलेक्टर के कार्यव्यवहार की निंदा का प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री के आगर आगमन को लेकर पत्रकारों ने सीधे उनसे मुलाकात कर अपनी बात रखी और ज्ञापन सौंपा।
‘प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद जरूरी’
पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को बताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन और मीडिया एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि जनहित के लिए समानांतर रूप से काम करने वाले महत्वपूर्ण पक्ष हैं। प्रशासन के निर्णयों, योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में प्रशासन और पत्रकारों के बीच संवादहीनता की स्थिति किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
पत्रकारों का कहना है कि जिले में अधिकारियों और मीडिया के बीच सहज संवाद की परंपरा रही है, लेकिन वर्तमान कार्यशैली को लेकर पत्रकारों में असंतोष बढ़ा है। इसी असंतोष को लेकर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी है।
मुख्यमंत्री से स्पष्ट मांग—कलेक्टर को हटाया जाए
ज्ञापन में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना को आगर-मालवा जिले से हटाने की मांग की। साथ ही ऐसे अधिकारी की पदस्थापना की मांग की गई, जो प्रशासन, पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ बेहतर समन्वय एवं संवाद स्थापित करते हुए कार्य करे।मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाने के साथ ही अब जिले में कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर उठी आवाज सीधे सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है।

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