दबंग देश सोभाग प्रजापति
धामनोद/ नगर के श्री वेंकटेश बालाजी मंदिर में राधा अष्टमी पर्व से प्रारंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस व्यास पीठ पर विराजित संत श्री नारायण प्रसाद ओझा द्वारा भागवत प्रसंग के अलावा ज्ञान वर्धन एवं समाज के उत्थान हेतु बड़े ही सरल शब्दों में व्याख्या की जाती है आज की कथा में दक्ष प्रजापति कपिल उपाख्यान एवं सती की कथा के साथ ही बताया कि हमारा समाज बेटी को भार समझता है किंतु बेटी तो ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक उपहार है बेटा तो केवल एक ही कुल को तारता हे किंतु बेटी दो कुल की शान होती हे बेटी का जब जन्म होता है तो वह अपनी किस्मत साथ में लेकर आती है।
इसलिए बेटी को कभी भी बोझ नहीं समझना चाहिए उन्होंने बताया कि हम मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं वहां पर सिर्फ परमात्मा के दर्शन होते हैं किंतु धर्म तो हमारे विचारों में होता है यदि हमारे विचारों में शुद्धता है तो हम रिश्तो का मूल्य समझ पाते हैं पिता को पिता माता को माता बहन को बहन को भाई को भाई अपने विचारों की शुद्धता से ही मान्यता दे पाते हैं धर्म के चार पैर होते हैं तप, त्याग, यज्ञ एव दान, कलयुग में दान को सर्वश्रेष्ठ मान्यता दी गई हे जीवन में दान करते रहना चाहिए जिससे हमारा लोक एवं परलोक दोनों ही कल्याणकारी होते हैं कथा दोपहर 1:00 बजे से प्रारंभ होकर संध्या 5:00 बजे तक अनवरत चलती है कल की कथा में श्री कृष्ण जन्मोतस्व धूमधाम से मनाया जाएगा
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