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पर्युषण पर्व के पाँचवें दिन भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास एवं भक्ति भाव से मनाया On the fifth day of Paryushan festival, the birth anniversary of Lord Mahavir Swami was celebrated with great joy and devotion.

कल्पसूत्र जी के जन्म वाचन के पश्चात निकली भव्य रथयात्रा, जिनालय में गूंजे भगवान महावीर के जयकारे

14 स्वप्नों के लाभार्थियों ने स्वप्नों को सिर पर धारण कर किया पुण्यलाभ

सोने-चांदी के वर्क से प्रभुजी की मनोहारी अंगरचना, जिनालय दीप एवं पुष्पों से हुआ जगमग

झाबुआ। स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में पर्युषण महापर्व के पाँचवें दिन भगवान श्री महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक का पावन अवसर अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। पूज्य साध्वी भगवंत श्री अविचलद्रष्टा श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक की आराधना एवं अनुमोदना की।


जन्मोत्सव के अवसर पर पूरे बावन जिनालय को आकर्षक फूलों एवं दीपकों से सजाया गया। जिनालय का वातावरण भगवान महावीर स्वामी के जयकारों एवं भक्तिमय गीतों से गूंज उठा। भगवान श्री महावीर स्वामी सहित मूलनायक भगवान आदिनाथ, श्री केसरियानाथ भगवान एवं गुरुदेव की सोने एवं चांदी के वर्क से मनोहारी अंगरचना की गई।

कल्पसूत्र जी में हुआ भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन

श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि पर्युषण पर्व के पाँचवें दिन श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पौषधशाला में कल्पसूत्र जी के अंतर्गत भगवान महावीर स्वामी के जन्म का वाचन पूज्य साध्वी भगवंत श्री अविचलद्रष्टा श्री जी महाराज साहेब द्वारा किया गया।


जन्म वाचन से पूर्व जिनालय को फूलों एवं दीपकों से विशेष रूप से सजाया गया। इस अवसर पर गौरव-सलोनी कोठारी भगवान महावीर स्वामी के माता-पिता बने, जबकि चयन-नेहा कटारिया ने इंद्र-इंद्राणी का स्वरूप धारण किया। निखिल भंडारी ने ज्योतिषाचार्य एवं श्रुति सकलेचा ने प्रियंवदा दासी का स्वरूप निभाया।


भगवान की माता त्रिशला द्वारा देखे गए 14 स्वप्नों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। सभी 14 स्वप्नों को मयंक कुमार नांदेचा वोरा परिवार द्वारा बधाकर लाभार्थी परिवारों को प्रदान किया गया।


राजेंद्रकुमार अंकित अर्पित कटारिया परिवार द्वारा पूज्य साध्वीजी भगवंत को जन्म वाचन की विनती की गई। भगवान के जन्म के समय मुकेश कुमार नाकोड़ा परिवार द्वारा भगवान की प्रतिमा के दर्शन कराने का लाभ लिया गया। वहीं उल्लास उमंग जैन द्वारा थाली एवं डंका बजाकर भगवान के जन्म की सूचना दी गई।

संजय राजेश जैन परिवार, राणापुर द्वारा भगवान को पालने में झुलाने का लाभ लिया गया, जबकि अनिल रूनवाल द्वारा केसरिया रंग के छापे लगाए गए। 14 स्वप्नों की बोली लेने वाले लाभार्थियों ने स्वप्नों को अपने सिर के ऊपर धारण कर पुण्यलाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता द्वारा किया गया।


जन्म वाचन के पश्चात निकली प्रभुजी की रथयात्रा

भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन के पश्चात अत्यंत उल्लास एवं भक्ति के वातावरण में प्रभुजी की रथयात्रा निकाली गई। प्रियंका नाहर भगवान को रथ में लेकर विराजमान थीं, जबकि राश्व निशान शाह भगवान के सारथी बनकर रथ चला रहे थे। भगवान के दोनों ओर हियांश-गाथा सकलेचा एवं जेनिका राठौर चंवर ढुला रहे थे।


रथयात्रा में सबसे आगे श्रावक वर्ग चल रहा था। उसके पश्चात भगवान का रथ, फिर पूज्य साध्वी भगवंत एवं 14 स्वप्नों को सिर पर धारण कर चल रही श्राविकाएं थीं। पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान के परिवार का स्वरूप धारण कर रथयात्रा में शामिल हुए। युवाओं द्वारा “त्रिशला नंदन वीर की—जय बोलो महावीर की” सहित भगवान महावीर स्वामी के जयघोष लगाए जा रहे थे।


रास्ते में जगह-जगह समाजजनों द्वारा अक्षत एवं श्रीफल से भगवान के सम्मुख गहुली की गई। रथयात्रा रूनवाल बाजार, थांदला गेट, मेन मार्केट एवं राजवाड़ा होते हुए पुनः बावन जिनालय पहुंची।

विभिन्न आरतियों एवं महाआरती का हुआ आयोजन

रथयात्रा के जिनालय पहुंचने के पश्चात विभिन्न आरतियों का आयोजन हुआ। मूलनायक भगवान की आरती एवं मंगल दीपक का लाभ श्रीमती आनंदीदेवी लक्ष्मीचंद नेताजी परिवार ने लिया।


श्री केसरियानाथ भगवान की आरती का लाभ राजेंद्र-अंकित रूनवाल परिवार ने, मुनिसुव्रत स्वामी भगवान की आरती का लाभ हस्तीमल संघवी परिवार ने लिया।


भगवान महावीर स्वामी की महाआरती का लाभ श्रीमती मानकबाई बाबूलाल, निलेश अक्षय लोढ़ा परिवार ने लिया। गौतम स्वामीजी की आरती महेंद्र मुथा परिवार द्वारा उतारी गई। नवकार मंत्र एवं मणिभद्रजी की आरती का लाभ पंकज दयड़ा परिवार ने लिया, जबकि गुरुदेव की आरती का लाभ दीपांशु संघवी एवं सौरभ कोठारी ने प्राप्त किया।

पंजेरी की प्रभावना एवं साधर्मी वात्सल्य

आरती के पश्चात श्रीमती श्यामूबाई रतनलालजी एवं मुकेशजी रूनवाल परिवार द्वारा पंजेरी की प्रभावना वितरित की गई। इस अवसर पर समाजजनों के लिए साधर्मी वात्सल्य का भी आयोजन किया गया।

सोने-चांदी के वर्क से प्रभुजी की मनोहारी अंगरचना

भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक वाचन के पावन अवसर पर बावन जिनालय के मूलनायक भगवान आदिनाथ, श्री केसरियानाथ भगवान, भगवान महावीर स्वामी एवं गुरुदेव की सोने एवं चांदी के वर्क से आकर्षक एवं मनोहारी अंगरचना की गई।


वहीं संस्कार मेहता, आदर्श जैन, सार्थक मेहता, हर्ष सेठिया सहित युवाओं द्वारा पूरे जिनालय को दीपकों एवं पुष्पों से सजाया गया। शाम को प्रतिक्रमण के पश्चात प्रभु भक्ति का आयोजन हुआ, जिसमें समाजजनों ने भाव-विभोर होकर भगवान की आराधना की।


समूचा बावन जिनालय “वीर प्रभु महावीर की जय”, “त्रिशला नंदन वीर की—जय बोलो महावीर की” के जयघोषों से गुंजायमान रहा। भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव ने पूरे जैन समाज को अहिंसा, संयम, आत्मसाधना एवं धर्म आराधना का संदेश देते हुए भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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