अमर सेन दंबग देश
दमोह /पटेरा कृषि कार्यालय से शुक्रवार देर रात करीब 11:30 बजे जिंक की लगभग 50 बोरियां एक छोटा हाथी वाहन में लोड कर कुम्हारी क्षेत्र भेजे जाने की सूचना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे कुछ युवाओं ने वाहन की वीडियो रिकॉर्डिंग करते हुए मामले की जानकारी जुटाई। पूछताछ के दौरान कृषि विभाग के कर्मचारी अंकुश शिवहरे ने बताया कि वाहन कुम्हारी क्षेत्र में किसानों के लिए जिंक पहुंचाने भेजा जा रहा था। अंकुश शिवहरे के अनुसार, कार्यालय का नियमित कार्य समाप्त होने के बाद शाम करीब 6:30 बजे सभी कर्मचारी घर चले गए थे।
रात करीब 9:30 बजे वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया, जिसमें बताया गया कि जमुनिया एवं कुम्हारी क्षेत्र के किसानों के लिए जिंक उपलब्ध हो गई है और किसानों के लगातार फोन आने के कारण इसे तत्काल भिजवाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भोजन के बाद कार्यालय पहुंचकर ताला खोला गया और लगभग 50 बोरियां वाहन में लोड करने में समय लगने के कारण रात 11:30 बजे तक कार्य चलता रहा। इसी दौरान कुछ लोग पहुंचे और वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे। शिवहरे ने बताया कि वीडियो रिकॉर्डिंग के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया।
पहली बार बात हुई, लेकिन बाद में फोन बंद मिलने पर एहतियात के तौर पर वाहन सहित जिंक की बोरियों को पुलिस थाना पटेरा की अभिरक्षा में सुरक्षित रखवा दिया गया।इस संबंध में वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी दिनेश कुमार साहू ने बताया कि जिंक किसानों को वितरण के लिए भेजी जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कृषि विभाग का सरकारी माल नहीं, बल्कि एक संस्था द्वारा उपलब्ध कराया गया स्टॉक है। किसानों को 50 किलोग्राम की एक बोरी लगभग ₹3,700 के निर्धारित शुल्क पर दी जाती है। उन्होंने बताया कि बिना राशि जमा कराए किसी को भी जिंक नहीं दी जा सकती, क्योंकि संस्था के भुगतान की जिम्मेदारी विभागीय प्रक्रिया के तहत रहती है। कुम्हारी क्षेत्र में जिंक उपलब्ध नहीं थी, इसलिए पटेरा से वहां भेजी जा रही मामले की जानकारी मिलने पर जिला मुख्यालय दमोह से तीन सदस्यीय जांच दल पटेरा पहुंचा।
टीम ने कृषि कार्यालय का निरीक्षण कर दस्तावेजों एवं परिस्थितियों की जांच की। जांच दल में परियोजना संचालक आत्मा एस.एल. कुर्मी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आर.के. जैन तथा कृषि जिला समन्वयक गिरवर पटेल शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट की जाएगी। प्रारंभिक जांच में कोई स्पष्ट अनियमितता सामने नहीं आई है।इस बीच कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि एक दिन पूर्व तहसीलदार द्वारा कृषि कार्यालय के स्टोर एवं एक अन्य कक्ष को सील किया गया था। इस पर दिनेश कुमार साहू ने स्पष्ट किया कि जिन कमरों को सील किया गया है, उनमें बीज एवं अन्य सामग्री रखी हुई है। जिंक जिस कक्ष में रखी गई थी, वह सील नहीं था, क्योंकि वह संस्था का स्टॉक था। उन्होंने कहा कि सील किए गए कमरों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। जिला स्तरीय टीम की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


Post a Comment