कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष टीम के साथ पहुंचे,कंट्रोल रूम से कचरा प्रोसेसिंग तक समझा पूरा सिस्टम
रितेश जैन दबंग देश
इंदौर। स्वच्छता में लगातार देश-दुनिया में अपनी पहचान बना रहे इंदौर का मॉडल अब पश्चिम बंगाल भी अपनाने की तैयारी में है। बंगाल के कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष अधिकारियों की टीम के साथ एक दिवसीय दौरे पर इंदौर पहुंचे। टीम ने यहां कंट्रोल रूम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, कचरा सेग्रीगेशन, कलेक्शन और प्रोसेसिंग सिस्टम को करीब से समझा। मंत्री ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से मुलाकात कर इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था की जानकारी ली।
इंदौर की मेहनत बंगाल के लिए बनेगी सीख
दिलीप घोष ने कहा कि इंदौर आज नहीं, बल्कि करीब 20 वर्षों से स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। बंगाल की टीम इसी यात्रा और सिस्टम को समझने आई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की चर्चा होते ही इंदौर का नाम सबसे पहले आता है, इसलिए इसे मॉडल मानकर पूरी व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है।
सिर्फ सफाई नहीं पूरा सिस्टम समझने आए
मंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि इंदौर में सफाई कैसे होती है। कचरा कहां से उठता है, कैसे अलग होता है, कहां पहुंचता है और किस तरह प्रोसेस होता है पूरी चेन को समझा जा रहा है। टीम कंट्रोल रूम के बाद फील्ड और प्रोसेसिंग प्लांट का भी अवलोकन किया ।
बंगाल ने माना हम पीछे हैं
घोष ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छता के मामले में पश्चिम बंगाल अभी पीछे है। कुछ व्यवस्थाएं जरूर हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं।इंदौर कई मायनों में देश के बाकी शहरों से आगे है।इंदौर ने लंबे समय में जो सिस्टम तैयार किया है,उसे समझकर बंगाल में चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रयास किया जाएगा,
बंगाल की टीम में कौन-कौन
IIT प्रोफेसर डॉ. नियोगी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी,खड़गपुर के इंजीनियर रोड डेवलपमेंट इंजीनियर, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी
स्वच्छता की बात आती है तो इंदौर का नाम सबसे पहले आता है,इंदौर एक मॉडल है, इसी मॉडल को समझने आए हैं*- दिलीप घोष, कैबिनेट मंत्री, पश्चिम बंगाल
देश में जहां अच्छा काम हो रहा है, उन अच्छे मॉडलों को देखकर पश्चिम बंगाल में लागू करने की कोशिश हो रही है। इंदौर का स्वच्छता मॉडल भी इसी बदलाव की कड़ी है। उन्हें कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में इंदौर के स्वच्छता मॉडल का प्रेजेंटेशन दिया*-


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