सुखमय जीवन के लिए प्रेम विश्वास और संस्कार आवश्यक का पंडित पाठक।
रवि चौरसिया दबंग देश
गंजबासौदा। जीवन की गाड़ी सही और संतुलित चले इसके लिए पति और पत्नि के बीच प्रेम, विश्वास, समपर्ण और संतुलन आवश्यक है। यदि पति पत्नि के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण नहीं है तो जीवन नर्क के समान हो जाता है। पहले हमारे समाज में बड़े बुजुर्ग कन्या के संस्कार देखते थे। उसकी सुंदरता नहीं। वैवाहिक जीवन सुखमय रहता था। आज पहले सुंदरता देखी जाती है। संस्कार नहीं। इसी कारण वैवाहिक जीवन नर्क होता जा रहा है। यह बात शनिवार का भगवान श्री रामदेव की कथा सुनाते गुरुदेव पं. हरिनारायण पाठक ने कही। उन्होंने भगवान श्रीरामदेव और माता नेतलदे के विवाह के माध्यम से कहा नेतलदे जन्म से अपंग थी।
अपंगता के बाद भी श्रीरामदेव जी ने उनसे विवाह का प्रस्ताव स्वीकार किया। भगवान ने सुंदरता नहीं संस्कार और समपर्ण को देखा । मां नेतलदे के श्रीरामदेव जी पर अटूट विश्वास और समपर्ण की शक्ति ने असंभव भी संभव बना दिया। नेतलदे की अपंगता अपने आप समाप्त हो गई। अर्थात हमारा जीवन यह गाड़ी परमात्मा की कृपा से चल रही है। यह गाड़ी निर्विघन चलती रहे। उसके लिए ईश्वर के प्रति भाव जागृत कराना होंगे। जब ईश्वर के प्रति सच्चा समर्पण होगा। तो ईश्वर की कृपा से जीवन में आने वाले विघ्न (अपंगता)दूर होतीे हैं। जीवन में सुखद शांति का पदार्पण होता है। हमें समर्पण और विश्वास के साथ ईश्वर की शरण में जाना चाहिए। कथा के दौरान भगवान के विवाह की झांकी का मंचन किया गया। श्रद्धालुओं ने आरती उतारी । पंडाल में श्रद्धालु जमकर नाचे। पुष्पों की वर्षा की गई।

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