आस्था बनी ठगी का हथियार
बाल हनुमान जी की मूर्ति के नाम पर ₹1099 वसूले, पार्सल में निकला सस्ता नेकलेस
दबंग देश अनिल शर्मा गंजबासौदा
गंज बासौदा।इंस्टाग्राम, फेसबुक या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील्स या आकर्षक विज्ञापन देखकर अगर आप सामान ऑर्डर करने जा रहे हैं, तो जरा ठहरिए जाइए… यह खबर आपके लिए एक जरूरी चेतावनी है। सोशल मीडिया पर आस्था और भरोसे के नाम पर ठगी का एक नया खेल चल रहा है, जिसमें लोगों को धार्मिक प्रोडक्ट दिखाकर ऑर्डर लिया जाता है और बदले में सस्ता व नकली सामान भेज दिया जाता है। नगर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें आस्था के नाम पर इस तरह की धोखाधड़ी करके उपभोक्ताओं की श्रद्धा से विश्वासघात कर हजारों की चपत लगा दी है। ऐसे ही एक ताजा मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बुक की गई “बाल हनुमान जी की मूर्ति के नाम पर ₹1099 वसूलकर पार्सल में सिर्फ सस्ता नेकलेस भेजा गया, जिससे एक बार फिर ऑनलाइन ठगी का यह खतरनाक ट्रेंड उजागर हुआ है।उन्होंने इस मामले की शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की बात कही है।
मालूम हो कि इन दिनों सोशल मीडिया साइट पर विज्ञापनों की भरमार है। हर व्यक्ति के हाथ में एंड्राइड मोबाइल होने से कंपनियों को अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग का जबरदस्त हथियार मिल गया है। इस मार्केटिंग की बाढ़ में कई ऐसे गरोह भी सक्रिय हो गए हैं जो फेसबुक इंस्टाग्राम पर फर्जी लुभावने विज्ञापन दिखाकर लोगों को आकर्षित करते हैं जिसको देखकर लोग सामान बुक कर देते हैं और बाद में उन्हें नकली सामान मिलता हैं। मिल रोड निवासी धार्मिक प्रवृत्ति के अरुण ने भी ऐसे ही फेसबुक पर चल रहे एक धार्मिक विज्ञापन को देखकर मूर्ति का प्रोडक्ट का ऑर्डर किया था। विज्ञापन में “बाल हनुमान जी” से जुड़ा प्रोडक्ट दिखाया गया था, जिसे आस्था और श्रद्धा से जोड़कर प्रस्तुत किया गया था। इसी भरोसे में आकर उन्होंने कैश ऑन डिलीवरी (COD) के माध्यम से ₹1099 का ऑर्डर बुक किया।
इनवॉइस में लिखा बाल हनुमान, पार्सल में निकला धोखा
अरुण ने बताया कि जब पार्सल घर पहुंचा तो पैकेट के ऊपर लगे इनवॉइस में स्पष्ट रूप से “Bal Hanuman ji” और ₹1099 अंकित था। लेकिन जब पैकेट खोला गया तो उसमें एक बेहद सस्ता नेकलेस और कपड़े की कतरन निकली।इस मामले में पार्सल पर “SHIVOHAM GROUP” नाम अंकित है, जिसकी सत्यता संदिग्ध बताई जा रही है। वहीं इस विरोधाभास ने यह साफ कर दिया कि यह कोई गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया फ्रॉड है, जिसमें ग्राहकों को भ्रमित कर पैसा वसूला जा रहा है। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि ठगों ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को निशाना बनाया है। “


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