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सारणी में 'अदृश्य' ट्रैक्टरों का खूनी खेल RTO और प्रशासन 'कंबल ओढ़कर पी रहे घी', कानून की उड़ीं धज्जियां Bloody game of 'invisible' tractors in Sarni, RTO and administration 'drinking ghee under the blanket', law flouted

 

आदित्य यादव दबंग देश 

​सारणी/बैतूल: क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन का काला कारोबार अब केवल माफिया के भरोसे नहीं, बल्कि विभाग की 'मेहरबानी' से फल-फूल रहा है। सारणी की सड़कों पर बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रालियों ने यह साबित कर दिया है कि परिवहन विभाग (RTO) और प्रशासनिक अधिकारी 'कंबल ओढ़कर घी पी रहे हैं'। बाहर से सब कुछ नियमों के दायरे में होने का ढोंग है, लेकिन भीतर ही भीतर मिलीभगत की मलाई जमकर खाई जा रही है।


​RTO की 'अंधी' आंखें: कानून सिर्फ कागजों के लिए?

​सड़क सुरक्षा और नियमों का पाठ पढ़ाने वाला आरटीओ विभाग सारणी की सड़कों पर पूरी तरह 'नतमस्तक' नजर आ रहा है। नियम कहते हैं कि बिना नंबर प्लेट के वाहन को सड़क पर उतारना भी अपराध है, लेकिन यहां रेत से लदे दर्जनों ट्रैक्टर सीना तानकर अधिकारियों के सामने से गुजरते हैं।

​बड़ा सवाल: क्या आरटीओ के उड़नदस्ते सिर्फ छोटे वाहन चालकों को परेशान करने के लिए हैं?

​माफिया पर मेहरबानी: इन 'अदृश्य' ट्रैक्टरों पर कार्रवाई करने के बजाय आरटीओ ने चुप्पी क्यों साध रखी है? क्या इस चुप्पी की कोई 'बड़ी कीमत' वसूली जा रही है?

​रॉयल्टी और RTO का 'मैजिकल' गठजोड़

​क्षेत्र में चर्चा है कि बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के इन वाहनों को रॉयल्टी की पर्चियां कैसे मिल रही हैं? यह खनिज विभाग और आरटीओ के बीच के उस 'अदृश्य पुल' की ओर इशारा करता है, जहां नियमों को ताक पर रखकर माफिया को खुली छूट दी गई है। बिना नंबर के वाहनों को वैध कागजात के बिना रॉयल्टी जारी करना एक बड़े 'प्रशासनिक सिंडिकेट' की ओर इशारा करता है।

​लाखों का राजस्व और 'घी' का स्वाद

​एक तरफ सरकार राजस्व बढ़ाने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ सारणी में अधिकारियों की नाक के नीचे शासन को हर दिन लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी शांति' बताती है कि उन्हें शासन के राजस्व से ज्यादा 'कंबल के नीचे मिलने वाले घी' की चिंता है।

​खतरे में आम जनता: जिम्मेदारी किसकी?

​बिना नंबर प्लेट के ये ट्रैक्टर किसी भी वक्त बड़ी सड़क दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। यदि कोई हादसा होता है, तो आरटीओ और पुलिस किसे पकड़ेगी? पहचान छुपाने के लिए जानबूझकर नंबर प्लेट नहीं लगाना एक गंभीर साजिश है, जिसे प्रशासन का मौन समर्थन प्राप्त है।

​जनता का सीधा आरोप:

​परिवहन विभाग (RTO): चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति, लेकिन रेत माफिया को फ्री पास।

​खनिज विभाग: बिना नंबर के वाहनों को रॉयल्टी का 'जादुई सहारा'।

​प्रशासनिक अधिकारी: मुस्तैदी का नाटक और अंदर ही अंदर 'कंबल ओढ़कर घी' पीने का काम।

​"सारणी की सड़कें अब माफिया का चारागाह बन चुकी हैं। अगर आरटीओ और प्रशासन अब भी नहीं जागे, तो जनता को यह समझने में देर नहीं लगेगी कि भ्रष्टाचार की मलाई में किसका-किसका हिस्सा है।"

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