गंगा दशहरा पर भारतमाता मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंगों प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ सम्पन्न,
मंदिर परिसर में वेद मंदिर और गौमाता मंदिर भी बनाया जाएगा- हेमलता दीदी।
सुनील कवलेचा दबंग देश उज्जैन।
भारतमाता सेवाश्रम न्यास के तत्वावधान में बन रहे श्री भारतमाता मंदिर आलमपुर उड़ाना में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्राण प्रतिष्ठा गंगा दशहरे पर विधी विधान के साथ पुर्ण हुई। श्री भारत माता मंदिर की संस्थापिका साध्वी हेमलता दीदी के सानिध्य में विश्व के प्रथम वेद मंदिर, गौमाता मंदिर, भारतमाता मंदिर एवं बारह ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रस्तावित हैं। उसी क्रम में रविवार को बारह ज्योतिर्लिंग मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। तीन दिनों तक हवन पूजन कर विद्ववानजनों ने वेदमंत्रों से कार्य संपन्न करवाया। त्रिदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि महाकालेश्वर मंदिर के प्रमुख पुजारी एवं अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा मदन सांखला, योगेन्द्रसिंह कोकलाखेड़ी, महेश तिवारी विहिप, मनीष रावल, परमानंद महाराज रहे। इस प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन के मुख्य यजमान ईश्वरीय प्रसाद शर्मा, पं. भरत शर्मा बिछड़ौद, मनमोहन गुप्ता इंदौर रहे। श्री भारतमाता सेवाश्रम न्यास सचिव दीक्षा पंड्या ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। विगत 9 वर्षों से श्री भारतमाता मंदिर का कार्य चल रहा है। श्री भारतमाता मंदिर एक राष्ट्र जागरण का कार्य करेगा। दीदी का संकल्प है भारत को भय, भ्रष्टाचार, अनाचार, पापाचार, अनैतिकता से मुक्त कर पुनः विश्वगुरू के पद पर प्रतिष्ठित कर सनातन धर्म का परचम संपूर्ण विश्व में फैले और एक कीर्तिमान स्थापित हो।
वेद मंदिर और गौमाता मंदिर भी बनाया जाए- हेमलता दीदी।
दीदी ने कहा हम वेद के अनुयायी हैं इसलिए वेद का प्रचार प्रसार होता रहे इस हेतु प्रांगण में वेद मंदिर भी बनाया जाएगा। गौमाता मंदिर भी बनाया जाए क्योंकि गौमाता के अंदर तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से गौमाता हमारे देश का धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कृषि शास्त्र, विज्ञान शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, पर्यावरण शास्त्र अर्थात देश का प्राण है। इस हेतु गौमाता का पूजन ही नहीं अपितू पालन ही समाधान है। ऐसी शिक्षा जहां से युवाओं को प्राप्त होगी। ऐसा अद्वितीय श्री भारतमाता सेवाश्रम न्यास का संकल्प है। इसी श्रृंखला में विगत 9 वर्षों से अखंड ज्योति एवं श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग अभिषेक पूजन होता आ रहा है। अखंड ज्योति जो कि 51 शक्तिपीठ में से एक विश्व प्रसिध्द अम्बाजी शक्तिपीठ से लायी गयी है। इस मंदिर की महत्ता और भी इसलिए बढ़ जाती है जिसका भूमिपूजन महामंडलेश्वर युगपुरूष स्वामी परमानंद गिरी महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ था जो साध्वीजी के गुरूदेव हैं। श्री भारतमाता सेवाश्रम न्यास एक परमार्थिक ट्रस्ट है। उक्त जानकारी प्राण प्रतिष्ठा के यजमान पं. भरत शर्मा बिछड़ौद ने दी।

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